केबीसी के सेट पर फिसले अमिताभ बच्चन, लगी चोट - ऑडियंस को होने लगी चिंता
अमिताभ बच्चन ने कहा, "आमतौर पर मैं बीच में खड़े होकर अपना मोनोलॉग करता हूं, लेकिन आज मेरे घुटने में चोट लगी है.
कल शूटिंग के दौरान मैं फिसलकर गिर गया और मेरे घुटने में चोट लग गई."
अमिताभ बच्चन ने केबीसी 18 के एपिसोड में अपनी चोट के बारे में दर्शकों को बताया
अमिताभ बच्चन 83 वर्ष में भी काम कर रहे हैं.
दरअसल, और दिन की तरह केबीसी सेट पर बिग बी की एंट्री खड़े होकर नहीं बल्कि बैठकर हुई.
उन्होंने कहा, "आमतौर पर मैं बीच में खड़े होकर अपना मोनोलॉग करता हूं, लेकिन आज मेरे घुटने में चोट लगी है.
कल शूटिंग के दौरान मैं फिसलकर गिर गया और मेरे घुटने में चोट लग गई."
अमिताभ बच्चन ने अपने घुटने की ओर इशारा करते हुए चोट के बारे में बताया, जिसके बाद ऑडियंस को चिंता होने लगी.
उन्होंने भरोसा दिलाया कि चोट गंभीर नहीं है और कहा कि केबीसी कंटेस्टेंट्स से बातचीत करते समय वे खड़े ही रहेंगे.
हालांकि, तकलीफ की वजह से उन्होंने शो के शुरुआती हिस्से में बैठकर रहने का फैसला किया. दर्शकों ने एक्टर के जल्द ठीक होने की कामना की.
अमिताभ बच्चन ने ओपनिंग के बाद रोलओवर कंटेस्टेंट शौर्य दास का हॉट सीट पर फिर से स्वागत किया.
उन्होंने अपना खेल खेला और कम रकम वाले सवालों के सही जवाब देने के बाद 50 लाख रुपये के सवाल तक पहुंचने में कामयाब रहीं.
हालांकि 50 लाख के सवाल में वह उलझन में पड़ गईं.
सवाल- 1930 के दशक में लखनऊ यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी का काम उस आर्किटेक्ट को सौंपा गया था, जिसने किस देश की राजधानी का डिजाइन भी तैयार किया था?
सही जवाब न चुन पाने की वजह से शौर्य दास ने गेम छोड़ने का फैसला किया और 25 लाख रुपये जीते.
लेकिन गेम छोड़ने के बाद, उन्होंने बताया कि अगर वह खेलती रहतीं, तो कैनबरा चुनतीं.
उनका जवाब सही निकला. जो लोग नहीं जानते, उन्हें बता दें कि सही जवाब कैनबरा ही था.
ऑस्ट्रेलिया की राजधानी का डिजाइन आर्किटेक्ट वाल्टर बर्ली ग्रिफिन ने तैयार किया था. उन्हें 1913 में ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने बुलाया था क्योंकि शहर की प्लानिंग के लिए हुए कॉम्पिटिशन में उनका डिजाइन चुना गया था.
उन्होंने बाद में ग्रिफिन ने लखनऊ यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी पर काम किया, जिसका काम 1935 में शुरू हुआ था.
हालांकि शुरू में उन्होंने भारत में कुछ ही समय बिताने की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में उन्होंने देश में कई अन्य प्रोजेक्ट्स पर भी काम किया.
1937 में लखनऊ में उनका निधन हो गया. KBC 18 में शौर्य ने अपने करियर प्लानिंग पर भी बात की, जिसमें उन्होंने बताया कि वह अभी अपने माता-पिता के साथ रहती हैं और कोई नौकरी नहीं कर रही हैं.
क्योंकि वह स्टेट पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं.
इससे पहले उन्होंने UPSC परीक्षा की तैयारी करने की कोशिश की थी. लेकिन उन्हें यह मुश्किल लगी.
उनका अभी का लक्ष्य स्टेट UPSC परीक्षा पास करना और ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) बनना है.