Karwa Chauth: सुहागिनों ने पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना का व्रत
सरगी ग्रहण करने के साथ सुबह शुरू होने वाला यह निर्जला व्रत रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने और पति के हाथों जल ग्रहण करने के बाद पूरा होगा.

Karwa Chauth पूजा मुहूर्त,चंद्रोदय समय, सर्गी, व्रत कथा, पूजा और व्रत की जानकारी : पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ सुहागिनों ने करवाचौथ का व्रत सरगी के साथ शुरू

सरगी ग्रहण करने के साथ सुबह शुरू होने वाला यह निर्जला व्रत रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने और पति के हाथों जल ग्रहण करने के बाद पूरा होगा.

पहली बार व्रत (Karwa Chauth Vrat Katha) रखने वाली नवविवाहिताएं इसकी तैयारियों में जुटी हैं, तो कहीं वर्षों से इस परंपरा को निभा रही महिलाएं पूजा और श्रृंगार की खरीदारी में व्यस्त हैं.
बाज़ारों में भी पर्व की रौनक दिखाई दे रही है.
आज अर्नब तूफान का साया भी मंडरा रहा है, जिसके चलते चांद दिखने में थोड़ी देरी हो सकती है.
पंचांग के अनुसार, कुछ शहरों में चांद का दीदार 8 बजे से पहले ही हो जाएगा तो कुछ शहरों में 8 बजे के बाद चांद निकल सकता है.
ताजा मौसम अपडेट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के शहरों में चांद दिखाई देने में लगभग 10 से 20 मिनट की देरी हो सकती है.
आज के दिन सुहागिनों ने करवा चौथ का निर्जला उपवास रखा है.
शाम को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर अपने पति की लंबी आयु का वरदान मांगा जाएगा।
इस बार करवा चौथ पर बहुत ही शुभ योग बन रहा है। ऐसे में शुभ मुहूर्त में पूजा करने से उत्तम फल की प्राप्ति होगी।
पूजन समाप्त कर चंद्रमा को अर्घ्य देने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
चांद को अर्घ्य देते समय कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिए?
ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:
ॐ सों सोमाय नम:
ॐ सोमाय नमः
ओम् चन्द्राय नमः
ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम:
आज महिलाएं सोलह शृंगार कर शाम में करवा माता की पूजा-अर्चना करेंगी और करवा चौथ की कथा सुनने के बाद चांद निकलने का इंतजार करेंगी।
आज रात में चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारण करेंगी।
आज (29 अक्टूबर 2026) लखनऊ में करवा चौथ का चांद रात 8:01 बजे निकलेगा.
उत्तर प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों में चांद निकलने का समय इस प्रकार है:
1- नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम्।
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥
2- मम सुख सौभाग्य पुत्र-पौत्रादि सुस्थिर
श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।
3- ऊँ अमृतांदाय विदमहे कलारूपाय धीमहि तत्रो सोम: प्रचोदयात
4- करकं क्षीरसंपूर्णा तोयपूर्णमयापि वा।
ददामि रत्नसंयुक्तं चिरंजीवतु मे पतिः॥
इति मन्त्रेण करकान्प्रदद्याद्विजसत्तमे।
सुवासिनीभ्यो दद्याच्च आदद्यात्ताभ्य एववा।।
एवं व्रतंया कुरूते नारी सौभाग्य काम्यया।
सौभाग्यं पुत्रपौत्रादि लभते सुस्थिरां श्रियम्।।
देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि मे परमं सुखम।
रूपं देहि, जयं देहि, यशो देहि द्विषो जहि।।
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