सौरव दास-आशुतोष रांका पर भरोसा करने के सबूत नहीं: SEM
.मजिस्ट्रेट ने यह भी टिप्पणी की कि दोनों का आचरण 'कानून के प्रति सम्मान नहीं' दिखाता और वे डी-नोटिफाइड इलाकों में विरोध प्रदर्शन बुलाने के आदी प्रतीत होते हैं.सौरव दास-आशुतोष रांका को लेकर अदालत ने क्या कहा?
CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को लेकर अदालत की टिप्पणी सामने आई है.
दक्षिण-पश्चिम जिले के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने दोनों को 21 अक्टूबर तक आगे की न्यायिक हिरासत में भेजते हुए कहा है कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से शांति भंग होने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है
.मजिस्ट्रेट ने यह भी टिप्पणी की कि दोनों का आचरण 'कानून के प्रति सम्मान नहीं' दिखाता और वे डी-नोटिफाइड इलाकों में विरोध प्रदर्शन बुलाने के आदी प्रतीत होते हैं.
बता दें, पुलिस सूत्रों का कहना है कि CJP नेता आशुतोष रांका और सौरव दास से जुड़े ट्रेसपासिंग केस को क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है.SEM ने माना कि दोनों ने 11 अक्टूबर 2026 को मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए बॉन्ड की शर्तों का जानबूझकर उल्लंघन किया.
आदेश में कहा गया है कि बॉन्ड दाखिल करने के तुरंत बाद ही शांति भंग होने संबंधी कथित घटनाएं सामने आईं, जिससे उनके आचरण पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.
मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में कहा कि जांच अधिकारी (IO) की ओर से दाखिल आवेदन पर्याप्त सामग्री और तथ्यों से समर्थित है.
आदेश के अनुसार, रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री यह इशारा करती है कि दोनों के खिलाफ शांति भंग होने और सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की आशंका वास्तविक और गंभीर है.
अदालत ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी गतिविधियां दोबारा न करने का दोनों का आश्वासन परिस्थितियों और उपलब्ध सामग्री को देखते हुए भरोसा पैदा नहीं करता.