दुलारचंद यादव हत्याकांड में जेडीयू के विधायक अनंत सिंह की ज़मानत रद्द करने पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई.

दुलारचंद यादव हत्याकांड में जेडीयू से हाल ही में निकाले गए अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं.सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द किए जाने की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया है.

दुलारचंद यादव हत्याकांड में जेडीयू के विधायक अनंत सिंह की ज़मानत रद्द करने पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हत्या के मामले को सिर्फ राजनीतिक विवाद की तरह देखना गलत है.
कोर्ट ने कहा कि हम हाई कोर्ट का आदेश स्थगित कर रहे हैं.
बिहार के मोकामा से पूर्व विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह को पटना हाई कोर्ट से मिली जमानत को रद्द कर दिया है।
इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक हर हाल में सरेंडर करने का कड़ा आदेश दिया है
हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने पलटा
न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदेश और न्यायमूर्ति पी. वी. वराले की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट के जमानत देने के फैसले को त्रुटिपूर्ण माना।
सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि हाई कोर्ट ने अनंत सिंह को राहत देते समय उनके गंभीर आपराधिक इतिहास पर ठीक से विचार नहीं किया.
अदालत ने रिकॉर्ड को देखते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ 62 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, ऐसे में उन्हें जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
सुनवाई के दौरान अनंत सिंह के वकील ने कोर्ट से सरेंडर करने के लिए कुछ और समय की मांग की थी। इसके लिए अनंत सिंह की बेटी की आगामी शादी का हवाला दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया और आत्मसमर्पण के लिए 1 दिसंबर 2026 की अंतिम समयसीमा (डेडलाइन) तय कर दी.
इसके साथ ही अदालत ने ट्रायल कोर्ट को इस हत्याकांड की जांच और सुनवाई अगले चार महीनों के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 30 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान हुई एक हिंसक झड़प से जुड़ा है।
चुनावी रंजिश में हुए इस टकराव के दौरान दुलारचंद यादव नाम के व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अनंत सिंह पर हत्या की साजिश रचने (IPC 120B) का आरोप लगा था.
मार्च 2026 में पटना हाई कोर्ट ने उन्हें इस मामले में जमानत दे दी थी, जिसके बाद वे जेल से बाहर आ गए थे.
लेकिन दुलारचंद के पोते नीरज कुमार ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिस पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने अब यह बड़ा फैसला सुनाया है.
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