भाजपा ने तीसरी बार सरकार बनाकर हरियाणा की चुनौतियों से मुंहफेर लिया
हाल में तीसरी बार के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने दो साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड आमजन के सामने रखा।इस रिपोर्ट कार्ड में हरियाणा के समक्ष पेश आ रही चुनौतियों का कोई जिक्र नहीं था.
भाजपा हरियाणा में तीसरी बार सरकार बना लेना ताल ठोकने के लिए कम नहीं था,अब सत्ता का नशा सिर चढ़कर बोलने लगा है
हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी ने लगातार तीसरी बार सरकार क्या बनाई प्रदेश की वास्तविक चुनौतियों से मुंहफेर लिया.
आलोचकों को जवाब देने के लिए अपनी राह को सुधारने के बजाय आलोचक को ही निशाना बनाने की रणनीति तीसरी बार की ताजपोशी से ही आई
हाल में तीसरी बार के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने दो साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड आमजन के सामने रखा।इस रिपोर्ट कार्ड में हरियाणा के समक्ष पेश आ रही चुनौतियों का कोई जिक्र नहीं था.
हरियाणावासी रंगदारी वसूली का दंश झेल रहे है और आए दिन फायरिंग कर जीवन छीन लिया जाता है लेकिन रिपोर्ट कार्ड में इस पहलू पर कोई नजरसानी नहीं थी।
बड़े-बड़े कदम उठाने का दावा करने वाली यह सरकार ड्रग तस्करी पर रोक नहीं लगा पाई।ड्रग तस्कर अपनी करतूते लगातार जारी रखे हुए है
गाहे बगाहे पकड़े जाते है।तीसरे बार के मुख्यमंत्री अब ड्रग तस्करी के लिए हरियाणा से ज्यादा पंजाब की चिंता करते है
हरियाणा में शिक्षकों के हजारों पद खाली है और स्कूल भवनों की हालत जर्जर है।
बड़ी आलोचनाओं के बाद कमजोर स्कूल भवनों के पुनः निर्माण का फैसला किया गया है.
सरकारी शिक्षा ढांचा कमजोर होता गया और तीसरी बारिया सरकार सत्ता सुख में उनींदी बनी रही।रिपोर्ट कार्ड की नजर इधर नहीं आई
दूसरी बारिया सरकार तो यूनिवर्सिटी में ही नर्सरी से पी एच डी तक पढ़ाने का मॉडल बताती थी लेकिन वह मॉडल तीसरी बारिया नशे में गुम हो गया।
सालाना एक लाख रुपए से भी कम कमा पाने वाले परिवारों के बच्चों की पढ़ाई अब इस तीसरी बारिया सरकार ने ऊंची फीस वाले प्राइवेट स्कूलों के हवाले कर दिया.
शिक्षा ढांचे में निजी व्यापारियों का प्रवेश कमजोर आर्थिक स्थिति वाले समुदाय को शिक्षा से वंचित करता ही दिखाई देता है। सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी है.
पिछले बारह साल से प्रदेश के हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोल देने का वायदा अभी पूरा नहीं हुआ।सरकार चिकित्सकों की कमी दूर नहीं कर पा रही।
घंटों के अनुबंध पर चिकित्सकों की सेवाएं लेने की योजनाओं पर विचार किया जाने लगा है।
आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज करने वाले निजी अस्पताल समय पर भुगतान न मिलने से परेशान होकर पलायन कर रहे है.
दक्षिण हरियाणा की प्यासी धरती को रावी ब्यास नदियों के पानी का दशकों से इंतजार है।लेकिन इस तीन बारिया सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के रास्ता साफ कर देने के बाद भी टालमटोल का ही रवैया अपनाया है
सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2016 में ही सतलुज यमुना संपर्क नहर का निर्माण कर हरियाणा के हिस्से का नदी जल देने का आदेश दे दिया
लेकिन डबल इंजन की सरकार ने पंजाब के साथ अदालत से बाहर समझौता कर समाधान निकालने की दलील देकर समाधान को खूंटी पर टांग दिया।तीसरी बारिया सरकार इसे खुटी से उतरना नहीं चाहती.
हरियाणा में पिछले बारह साल से ही खरीफ और रबी की फसलों के समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए किसान को भारी जद्दोजहद से गुजरना पड़ता है.
फसल पहले आ जाती है और खरीद की शुरुआत कम से कम पंद्रह दिन बाद होती है
डबल इंजन सरकार का कोई फायदा यहां किसान को नहीं मिलता।खरीद शुरू होने के बाद भी हफ्तों इंतजार करना पड़ता है।रोड जाम करना पड़ता है और लाठियां झेलनी पड़ती हैं.
धान घोटाला भी लगातार होता रहा है,अधिकारियों पर कार्रवाई किया जाना मजबूरी बन गया है।
खेतों में जलभराव और सड़कों का नदी में बदलने की त्रासदी पिछले बारह साल से अनवरत जारी है.
वर्षाकाल बीत गया हाल में पलवल में जल निकासी के लिए ड्रेनेज प्रोजेक्ट मंजूर किया गया है।
घग्गर और टांगरी जैसी नदियों के कमजोर तटबंध बाढ़ को आमंत्रित करते है.
सिल्ट जमा होने से नदियों की वर्षाजल ग्रहण करने की क्षमता घट गई और वे जल्दी ही उफन जाती हैं।हर साल बाढ़ नियंत्रण के लिए मंत्री अधिकारियों की बैठक आयोजित करते है, लेकिन समाधान कहीं नज़र नहीं आया.