उत्तर प्रदेश में राज्य सभा चुनाव में दसवीं सीट को लेकर सपा और भाजपा आमने-सामने
कल से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो रही है.
सपा तीन उम्मीदवार खड़े कर सकती है, जबकि मौजूदा संख्या बल के हिसाब से उसके दो उम्मीदवारों की जीत ही तय है.
उत्तर प्रदेश में राज्य सभा के 16 अक्तूबर को होने वाले चुनाव सपा तीन उम्मीदवार खड़े कर सकती है, जबकि भाजपा आठ उम्मीदवार उतारने पर विचार कर रही है.

कल से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो रही है.
सपा तीन उम्मीदवार खड़े कर सकती है, जबकि मौजूदा संख्या बल के हिसाब से उसके दो उम्मीदवारों की जीत ही तय है.
सपा की ओर से फिर से वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव को राज्य सभा भेजने की बात है.
पूर्व आईएसएस आलोक रंजन और सलीम इकबाल के नामों की चर्चा है.
भाजपा आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बहुत नाप-तौल कर उम्मीदवारों के नामों पर मंथन कर रही है.
भाजपा के सात उम्मीदवारों की जीत तय है. विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपा आठ उम्मीदवार उतारने पर विचार कर रही है. ऐसे में क्रॉस वोटिंग पर नजरें टिकी रहेंगी.
सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय महामंत्रियों स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी को भाजपा उम्मीदवार बना सकती है.पार्टी जाट, राजपूत, ओबीसी और अल्पसंख्यक को भी टिकट दे सकती है.
वर्तमान ओबीसी सांसद गीता शाक्य और बीएल वर्मा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. वर्मा केंद्र में मंत्री हैं, लिहाज़ा उन्हें फिर से राज्य सभा भेजा जा सकता है.
गीता शाक्य को फिर से राज्य सभा भेजने की बात हो रही है.
राज्य भाजपा ओबीसी मोर्चे के अध्यक्ष प्रकाश पाल और रेखा वर्मा के नाम की भी चर्चा है.
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है. पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए पुरी को फिर से राज्य सभा भेजने की बात कही जा रही है.
दलित नेता बृजलाल की जगह किसी युवा दलित नेता को राज्यसभा भेजने की चर्चा है.
जाट नेता के रूप में पूर्व मंत्री संजीव बालियान और पूर्व सांसद सत्यपाल सिंह के नामों की चर्चा है. इसके साथ ही वरुण गांधी, सुरेश राणा, अमित मालवीय और राजबीर सिंह के नाम भी लिए जा रहे हैं.
आज लखनऊ में राज्य कोर समिति की बैठक में संभावित प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा की गई.
अगले तीन से चार दिनों में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में नामों पर मुहर लगाई जाएगी.
वर्तमान सांसदों नीरज शेखर और अरुण सिंह के बारे में चर्चा है कि उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ने को कहा जा सकता है.
सूत्रों के मुताबिक भाजपा विधानसभा चुनाव को ध्यान में रख कर उम्मीदवारों के नाम तय करेगी.
भाजपा के सामने अभी ब्राह्मण वोटों को अपने साथ बनाए रखने की चुनौती है.
लोक सभा चुनाव में छिटके गैर यादव ओबीसी वोट खासतौर से कुर्मी और गैर जाटव एससी वोटों को वापस लाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है. भाजपा युवाओं और महिलाओं को अधिक नुमाइंदगी देना चाहती है.
उत्तर प्रदेश में विधानसभा की संख्या 403 है. वर्तमान में 396 विधायक हैं.
ऐसे में उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 37 प्रथम वरीयता के वोट चाहिए. भाजपा के पास अभी 255 विधायक हैं.
इस तरह वह स्वयं ही सात सीटें जीतने की स्थिति में हैं.
वहीं सहयोगी दलों में अपना दल सोनेलाल 13, राष्ट्रीय लोक दल 9, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी 6, निषाद 05 सहयोगी दल हैं.
ऐसे में भाजपा और सहयोगी दलों के पास सात सीटें जीतने के बाद 33 सरप्लस वोट बचते हैं.
आठवीं सीट जीतने के लिए केवल चार अतिरिक्त वोट चाहिए जो जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के दो और असंबद्ध विधायकों को मिला कर पूरे हो सकते हैं.
समाजवादी पार्टी की बात करें तो उसके 101 विधायक हैं. कांग्रेस के दो विधायक भी उसके साथ हैं.
दो सीटें जीतने के बाद सपा के पास 29 वोट सरप्लस हैं,जबकि अतिरिक्त सीट जीतने के लिए उसे आठ वोट और चाहिए.
विधानसभा चुनाव सिर पर हैं. ऐसे में दसवीं सीट के लिए भारी पैमाने पर क्रॉस वोटिंग हो सकती है.
राज्य सभा चुनाव में व्हिप लागू नहीं होती यानी पार्टी उम्मीदवार के ख़िलाफ़ वोट डालने पर भी सदस्यता नहीं जाती.
मौलिक रिपोर्ट · भारत · संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित