देशभर में पांच दिवसीय पंचदीप महापर्व का शुभारंभ कल शुक्रवार 6 नवंबर से हो रहा है। दीपोत्सव 10 नवंबर तक चलेगा।
इसके पहले दिन आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि का जन्मोत्सव यानी धनतेरस का पर्व हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। द्विग्रही योग, हस्त नक्षत्र और प्रदोष के दुर्लभ व अत्यंत शुभ संयोग में होने वाली खरीदारी पुण्यकारी है। सनातन धर्म के मर्मज्ञों के अनुसार इससे लक्ष्मी-कुबेर की कृपा प्राप्त होगी, आरोग्यता के साथ घर में सुख-समृद्धि का वास होगा।
धनतेरस पर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में काफी लोग बही-खाता बदलकर वर्षभर उसी में काम करते हैं। धनतेरस के बाद श्री हनुमान जन्मोत्सव, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भइया दूज के पर्व लगातार मनाए जाएंगे। प्रतिदिन शाम को घर के मुख्य द्वार और नदियों के तट पर दीपदान करना पुण्यकारी होता है।
श्रीधर्मज्ञानोपदेश संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार कार्तिक कृष्णपक्ष की द्वादशी तिथि गुरुवार 5 नवंबर को दिन में 11.58 बजे लग चुकी है, जो छह नवंबर अर्थात शुक्रवार की सुबह 11.07 बजे तक रहेगी। सुबह 11.08 बजे से त्रयोदशी तिथि लग जाएगी। कन्या राशि में चंद्रमा-शुक्र के संचरण से द्विग्रही योग बनेगा।
हस्त नक्षत्र व प्रदोष का संयोग अत्यंत पुण्यकारी है। प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी से धन त्रयोदशी (धन्वंतरि जयंती) मनाई जाएगी। वहीं, व्यापार की प्रतीक तुला राशि में जगत की आत्मा व प्रत्यक्ष देवता सूर्य का संचरण होगा।
दोनों के मिलन से उद्योग-व्यापार का उत्थान होगा। साधकों को आंतरिक शक्ति की अनुभूति होगी। पूजन व खरीदारी का विशेष मुहूर्त
कार्तिक कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि अर्थात धनतेरस पर खरीदारी के साथ गणेश, लक्ष्मी व कुबेर का पूजन किया जाता है। इसके लिए स्थित और द्विस्वभाव लग्न खास होती है। आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार दोपहर 1.30 से 3.01 बजे तक कुंभ की स्थिर लग्न है।
फिर दोपहर 3.02 से शाम 4.30 बजे तक मीन लग्न द्विस्वभाव रहेगी। शाम 6.10 से रात 8.06 बजे तक वृष लग्न स्थिर रहेगी। इसमें खरीदारी व पूजन करना विशेष पुण्यकारी है।
लोहे की वस्तुएं न खरीदें पराशर ज्योतिष संस्थान के निदेशक आचार्य विद्याकांत पांडेय के अनुसार कार्तिक कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि पर देवता व असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था। समुद्र मंथन में आयुर्वेद के प्रवर्तक धन्वंतरि और मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ।
इसी कारण धनतेरस पर धनवंतरि का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। धनतेरस पर नई वस्तुएं खरीदने का विधान है। इसमें सोने-चांदी के सिक्के, आभूषण, पीतल की मूर्तियां, बर्तन खरीदा जा सकता है।
झाड़ू जरूर खरीदना चाहिए। झाड़ू लक्ष्मी का प्रतीक मानी जाती है, क्योंकि वो घर से दरिद्रता रूपी गंदगी को साफ करती है। झाड़ू खरीदने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
वहीं, लोहे की वस्तु, तेल, हल्दी व चना की दाल नहीं खरीदना चाहिए। राशि के अनुसार करें खरीदारी मेष: तांबा के बर्तन-कलश, मूर्तियां, भूमि और भवन ले सकते हैं।
वृषभ: चांदी के आभूषण अथवा उससे बनी देव मूर्तियां लेना शुभ है। मिथुन: चांदी का सिक्का अथवा कांसे का बर्तन लेना पुण्यकारी है। कर्क: चांदी के आभूषण, बर्तन व देव मूर्तियां, मोती की वस्तुएं ले सकते हैं।
सिंह: सोने की मूर्ति, आभूषण, तांबा के बर्तन, वाहन लेना शुभ है। कन्या: स्टील के बर्तन, वस्त्र व सोना-चांदी के आभूषण लेना शुभ है। तुला: चांदी का बर्तन, सिक्का लेना चाहिए।
वृश्चिक: तांबा के बर्तन, मूर्ति, सोने का सिक्का लेना शुभ है। धनु: सोने की मूर्ति, आभूषण, वस्त्र व पुखराज लेना चाहिए। मकर: चांदी का सिक्का, झाड़ू, स्टील के बर्तन, इलेक्ट्रानिक सामान लेना चाहिए।
कुंभ: चांदी का सिक्का, झाड़ू लेना शुभ है। -मीन: सोने से बनी मूर्ति, सिक्का अथवा आभूषण लेना चाहिए।

News Desk
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