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Diwali puja में गणेश और लक्ष्मी की मूर्ति किस दिशा में रखें?आइए जानें...

Diwali puja: दिवाली में गणेश और लक्ष्मी की पूजा की जाती है. पूजा में गणेश जी और माता लक्ष्मी की मूर्तियाँ किस दिशा में होनी चाहिए?

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Diwali puja : दिवाली पर मां लक्ष्मी धरती पर आती हैं इसलिए इस दिन भगवान राम, माता सीता के भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा का भी विधान है.

घर के मंदिर में सकारात्मक ऊर्जा से भरने के लिए माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की असीम कृपा पाने के लिए सही नियमों का पालन करना जरूरी है.

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आइए जानते हैं स्वामी शाश्वतानंद से दिवाली पूजा से जुड़े नियम....

दिवाली पूजा में मूर्ति किस दिशा में रखें 

स्वामी शाश्वतानंद के अनुसार, मंदिर की स्थापना के लिए ईशान कोण सबसे उत्तम माना जाता है.

दीवाली पूजा करते समय आपका मुख उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए.

पूजा के लिए मूर्तियों का मुख पश्चिम या दक्षिण दिशा की तरफ होना चाहिए.

दिवाली पूजा में भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की मूर्ति को रखते समय कई बार हम गलती कर बैठते हैं.

शास्त्रों के अनुसार, माता लक्ष्मी को हमेशा गणेश जी के दाहिने तरफ विराजमान करना चाहिए और गणेश जी को माता लक्ष्मी के बाएं तरफ विराजमान करना चाहिए.

अगर आप सामने की तरफ से मूर्तियों को देख रहे हैं तो गणेश जी बाईं तरफ और माता लक्ष्मी आपके दाहिने तरफ होनी चाहिए.

ऐसा इसलिए है क्योंकि बाईं तरफ पत्नी का स्थान होता है.

इसलिए माता लक्ष्मी को हमेशा दाहिनी तरफ ही विराजमान करना चाहिए.

दिवाली पूजा मूर्ति स्थापना के सही नियम 

स्वामी शाश्वतानंद के अनुसार, गणेश जी और माता लक्ष्मी की मूर्ति बैठी हुई अवस्था में होनी चाहिए.

 खड़ी हुई मूर्तियां दुकान या कारोबार के स्थान के लिए होती हैं.

मूर्तियों को कभी भी सीधा जमीन पर न रखें उन्हें हमेशा लकड़ी की चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर ही स्थापित करें.

गणेश जी की ऐसी मूर्ति लें जिसकी सूंड बाईं तरफ मुड़ी हुई हो.

गणेश जी और लक्ष्मी की मूर्ति कभी भी जुड़ी हुई न लें; दोनों मूर्तियां अलग-अलग होनी चाहिए. 

दिवाली पर कितने दिए जलाकर करें पूजा स्वामी शाश्वतानंद के अनुसार,

दिवाली की रात पूजा की थाली में और घर के बाकी हिस्सों को मिलाकर कम से कम 11, 21 या 31 दिए जलाना शुभ होता है.

पूजा की चौकी पर एक बड़ा चौमुखी दिया घी या तेल का जलाएं.

जो पूरी रात जलते रहें. 

दीयों का मुख हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए.

स्वामी शाश्वतानंद कहते हैं ऐसा करने से घर में सकारात्मक वातावरण बनता है.

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