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MDR Charge: टाला फैसला दिवाली तक UPI ट्रांजेक्शन पर नहीं लगेगा MDR चार्ज!

MDR Charge: दिवाली से पहले देशभर के व्यापारियों को UPI पेमेंट पर लगने वाले नए चार्ज से राहत मिली है। 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के कुछ नियमों को अब दिवाली के बाद तक टाल दिया गया है

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MDR Charge: टाला फैसला दिवाली तक UPI ट्रांजेक्शन पर नहीं लगेगा MDR चार्ज!

MDR Charge: दिवाली से पहले देशभर के व्यापारियों को UPI पेमेंट पर लगने वाले नए चार्ज से राहत मिली है। 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के कुछ नियमों को अब दिवाली के बाद तक टाल दिया गया है.

 UPI और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने त्योहारी सीजन में कारोबार पर पड़ने वाले असर को देखते हुए लिया है। नई तारीख की जानकारी अलग से दी जाएगी।

इस फैसले से उन दुकानदारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में डिजिटल पेमेंट लेते हैं। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) भी लगातार मांग कर रहा था कि नए चार्ज को त्योहारों के बाद लागू किया जाए। 

ध्यान देने वाली बात यह है कि फैसला चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन के लिए टाला गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर तरह के UPI पेमेंट पर MDR लगाने का फैसला पूरी तरह रद्द हो गया है।

UPI MDR चार्ज क्या है और फैसला क्यों टला? MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह फीस है, जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले कारोबारी के ट्रांजैक्शन पर लागू हो सकती है. 

14 सितंबर 2026 को MDR फ्रेमवर्क से जुड़ा नोटिफिकेशन जारी हुआ था। इसके अगले दिन नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने इस बारे में सर्कुलर जारी किया.

नए फ्रेमवर्क के तहत 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ मर्चेंट UPI पेमेंट पर 0.40% MDR प्रस्तावित था। त्योहारी सीजन में कारोबारियों पर अतिरिक्त लागत का असर न पड़े, इसलिए चुनिंदा ट्रांजैक्शन पर इसे दिवाली के बाद तक टालने का फैसला लिया गया है.

₹2,000 से कम के UPI पेमेंट पर कितना चार्ज? दिए गए फ्रेमवर्क के मुताबिक, 2,000 रुपये तक के ट्रांजैक्शन पर MDR शून्य रखा गया है।

 2,000 रुपये से ज्यादा के पात्र P2M पेमेंट पर 0।40% की दर तय की गई थी। हालांकि, कुछ खास कैटेगरी और छोटे कारोबारियों को राहत देने का प्रावधान भी है.

जिन छोटे दुकानदारों की दुकान के QR कोड पर हर महीने 1 लाख रुपये तक का पेमेंट आता है, उन्हें भी जीरो MDR कैटेगरी में शामिल किया गया है.

अलग-अलग ट्रांजैक्शन कैटेगरी के लिए 5 रुपये से 300 रुपये तक के फ्लैट चार्ज का भी जिक्र किया गया है। फ्रेमवर्क में पांच कैटेगरी के लिए प्रति ट्रांजैक्शन 5 रुपये का रियायती फ्लैट रेट रखा गया है।

इनमें पेट्रोल पंप पर पेमेंट, रेलवे से जुड़े UPI ट्रांजैक्शन, इंश्योरेंस प्रीमियम, टेलीकॉम सेवाओं के भुगतान और बिजली-पानी जैसे यूटिलिटी बिल शामिल हैं 

इस मॉडल में पात्र ट्रांजैक्शन पर रकम के हिसाब से प्रतिशत चार्ज लगाने के बजाय तय फीस रखी गई है.

यानी 5 रुपये का फ्लैट रेट लागू होने वाली कैटेगरी में 2,000 रुपये या 10,000 रुपये के पेमेंट पर भी चार्ज एक समान रह सकता है.

दुकानदारों और ग्राहकों को बड़ी राहत फैसले से व्यापारियों को दिवाली तक MDR लागत से राहत मिल सकती है. त्योहारों में खरीदारी बढ़ने से QR कोड के जरिए पेमेंट भी बढ़ते हैं.

ऐसे समय में चार्ज टलने से कारोबारियों को अपनी लागत संभालने का ज्यादा वक्त मिलेगा.

लेकिन ग्राहकों के लिए यह समझना जरूरी है कि MDR मुख्य रूप से मर्चेंट पेमेंट से जुड़ा चार्ज है.

 इसे टालने का फैसला अपने आप में यह नहीं बताता कि हर तरह के UPI ट्रांजैक्शन के नियम बदल गए हैं. लागू होने की नई तारीख और अंतिम कैटेगरी के लिए NPCI के आधिकारिक सर्कुलर की जानकारी देखना जरूरी होगा। 

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मौलिक रिपोर्ट · भारत · संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित

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