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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर CJP और दिल्ली पुलिस के बीच टकराव

सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने 24 घंटे में दूसरी बार उठाया? दोनों अपने समर्थकों के साथ जंतर-मंतर पहुंचे थे। यहां बैरिकेडिंग के बीच गेट के ऊपर से चढ़कर अंदर जाने और नारेबाजी करने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की।

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 CJP, Delhi Police ,Jantar Mantar

CJP फाउंडर सौरव दास और आशुतोष रांका कुछ समर्थकों के साथ पहुंचे जंतर-मंतर

सौरव दास और आशुतोष पास में स्थित JDU दफ्तर के परिसर की तरफ से अंदर आए और गेट पार करके प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़े।

पुलिस ने मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। 

इस मामले में FIR दर्ज किए जाने की संभावना भी जताई गई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

10 अक्टूबर को CJP फाउंडर अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट से ही हिरासत में लिया गया था

तीनों को 11 अक्टूबर को दिल्ली कैंट की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया।

 इसके बाद उन्हें 50-50 हजार रुपये के जमानती मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

रिहाई की शर्तों के तहत उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने और ऐसा कोई काम नहीं करने को कहा गया, जिससे शांति भंग हो सकती है। रिहाई के बाद तीनों ने अंगूठा दिखाकर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। करीब 23 घंटे हिरासत में रहने के बाद उनकी रिहाई हुई थी।

  • ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा क्यों मांग रही है CJP? CJP का विरोध वोटर लिस्ट के SIR को लेकर है।

पार्टी चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग इसी अभियान का हिस्सा है।

 द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी.

 रिपोर्ट में वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया के साथ चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर से जुड़े मुद्दों का जिक्र किया गया। एक मामले में फॉर्म-6 में SIR से संबंधित सवाल जोड़ने पर भी दोनों आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी। 

चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर तक पहुंच को लेकर उन्होंने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा था।

काम के बंटवारे से जुड़े एक आदेश पर भी नियमों के उल्लंघन का सवाल उठाया गया था। 

हालांकि इन आपत्तियों को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ किसी निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

इनके पूरे संदर्भ और संबंधित दस्तावेजों की पुष्टि जरूरी है। अब आगे क्या होगा?

 इस पूरे मामले में दो सवाल अहम हैं। पहला, क्या CJP को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मिलेगी या उसे दूसरे निर्धारित स्थलों पर जाना होगा?

 SIR को लेकर चुनाव आयोग पर उठाए जा रहे सवालों का जवाब किस तरह सामने आएगा? दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई प्रदर्शन स्थल को लेकर स्थिति साफ कर सकती है। 

CJP का आंदोलन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर केंद्रित है!

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मौलिक रिपोर्ट · भारत · संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर CJP और दिल्ली पुलिस के बीच टकराव | लोक हस्तक्षेप (Lok Hastakshep)