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जानी-मानी किस कार कंपनी ने लिया 1 लाख कर्मचारियों की छंटनी का फैसला?

फॉक्सवैगन (Volkswagen) एक मशहूर जर्मन ऑटोमोबाइल कंपनी है जिसका मुख्यालय वॉल्फ़्सबुर्ग, जर्मनी में स्थित है भारत में वोक्सवैगन मुख्य रूप से अपनी सुरक्षित, मजबूत बिल्ड क्वालिटी और बेहतरीन ड्राइविंग अनुभव वाली कारों के लिए जानी जाती है

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 Volkswagen, Porsche

फॉक्सवैगन के वर्कफोर्स में कटौती का फैसला है 'फ्यूचर प्लान 2030' का हिस्सा 

जानी-मानी कार कंपनी फॉक्सवैगन (Volkswagen) ने 2030 तक दुनिया भर में 50,000 और नौकरियां खत्म करने का फैसला किया है.

पहले चरण के तहत कंपनी ने यूनियन के साथ हुए समझौतों और मार्च 2026 तक की योजनाओं के तहत करीब 50,000 पदों को धीरे-धीरे खत्म करने पर सहमति जताई थी.

कई कर्मचारियों के साथ स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) और अर्ली रिटायरमेंट के समझौते पहले ही साइन हो चुके हैं.


अब दूसरे चरण के तहत सितंबर 2026 में कंपनी के सुपरवाइजरी बोर्ड ने 50,000 और अतिरिक्त नौकरियों की कटौती को मंजूरी दी है. 

ऐसा नहीं है कि एक लाख कर्मचारी काम से एकाएक निकाल दिए जाएंगे, बल्कि यह कंपनी की 'फ्यूचर प्लान 2030' का हिस्सा है.

कंपनी आगे चार सालों में धीरे-धीरे अपने वर्कफोर्स में कटौती करेगी. 

इससे पता चलता है कि कंपनी अपने 90 साल के इतिहास में पहली बार संकट और रीकंस्ट्रक्चरिंग के ऐसे दौर से गुजर रही है.

फॉक्सवैगन के इस फैसले का असर दुनिया भर में उसके कुल कर्मचारियों में से लगभग 15% पर पड़ सकता है. 

कंपनी यह कदम इसलिए उठा रही है क्योंकि उसे इलेक्ट्रिक कारों की कम मांग, ज्यादा लागत, अमेरिकी टैरिफ और चीनी कार मेकर्स से बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. 

फॉक्सवैगन मौजूदा बाजार की स्थिति के हिसाब से अपने कर्मचारियों की संख्या और प्रोडक्शन कैपेसिटी को कम करना चाहती है. 

इस कदम के साथ, कंपनी अपने इतिहास के सबसे बड़े रीस्ट्रक्चरिंग प्रयासों में से एक की ओर बढ़ रही है.

  • फॉक्सवैगन पर इस वक्त कई तरफ से दबाव है. एक तरफ यूरोप में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री उम्मीद के मुताबिक तेजी से नहीं बढ़ी है, इस सेगमेंट में चीनी कंपनियां मजबूत कॉम्पिटिटर बनकर उभर रही हैं.

दूसरी तरफ, जर्मनी में प्रोडक्शन कॉस्ट ज्यादा है और अमेरिकी टैरिफ का भी अलग से प्रेशर है.

अमेरिका ने यूरोपीय संघ (EU) से आयात होने वाली कारों और ट्रकों पर पहले के 25% की जगह टैरिफ को बढ़ाकर 30% कर दिया है.

फॉक्सवैगन के सीईओ ओलिवर ब्लूम का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ के नियमों के चलते कंपनी के सालाना ऑपरेटिंग प्रॉफिट को लगभग 5.9 अरब डॉलर (करीब 5 अरब यूरो) का सीधा नुकसान हो रहा है. 

फॉक्सवैगन के मुकाबले उसके लग्जरी ब्रांड पोर्शे को टैरिफ से ज्यादा नुकसान हो रहा है.

 इन सारी परेशानियों के बीच फॉक्सवैगन लागत कम करने के साथ-साथ अपने कामकाज को ज्यादा कुशल बनाना चाहती है.

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मौलिक रिपोर्ट · भारत · संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित

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